बुखार एवं शरीर पर लाल चकत्ते दिखें, तो तुरंत दें जानकारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. अठया ने बताया कि जिले में खसरा -रूबेला की रोकथाम एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष सतर्कता बरती जा रही है। नियमित टीकाकरण सत्रों के माध्यम से 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण लगातार किया जा रहा है, जिससे बच्चों को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
खसरा के लक्षण दिखें तो तुरंत स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता को दें सूचना
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चौहान ने 0 से 5 वर्ष के बच्चों के अभिभावकों से अपील करते हुए कहा है कि यदि किसी बच्चे को बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते, दाने, बहती नाक अथवा आंखे लाल होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसकी सूचना तुरंत अपनी ग्राम की आशा कार्यकर्ता, एएनएम, अथवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता को दें। यह खसरा के प्रारंभिक लक्षण हो सकते है। ऐसे में बच्चे को नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र जाकर चिकित्सक को अवश्य दिखायें एवं उपचार का पूर्णतः पालन करें। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया है कि बच्चों को एमआर के दोनों टीके अवश्य लगवाकर उनके भविष्य को जानलेवा बीमारियों खसरा-रूबेला से सुरक्षित करें।
एम.आर. के दो टीके, बच्चों को देते हैं खसरा से सुरक्षा
जिला टीकाकरण अधिकारी ने बताया कि खसरा 5 वर्ष तक के बच्चों मे होने वाली अत्यंत संक्रामक बीमारी है। इससे बचाव के लिए एमआर के दोनों टीके समय पर लगवाना आवश्यक है। पहला एमआर टीका 9 से 12 माह तथा दूसरा 16 से 24 माह की आयु में अवश्य लगवाएं। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों का टीकाकरण किसी कारणवश छूट गया है, उनके अभिभावक शीघ्र निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में संपर्क कर टीकाकरण पूर्ण कराए। एमआर (खसरा) का टीका, शरीर को खसरा के विषाणु से लड़ने के लिए तैयार करता है और बच्चों को गंभीर संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है।
एमआर का टीका पूर्णतः सुरक्षित एवं पीडा़ रहित
एमआर का टीका बच्चे के दाहिने बॉह की चमड़ी में लगाया जाता है। यह पूर्णतः सुरक्षित एवं पीड़ा रहित टीका है, जो बच्चों को जानलेवा खसरा एवं रूबेला जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने में प्रभावी है।


