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मध्य प्रदेश
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अमन और दिव्यांशी को मिला नया जीवन, योजना बनी वरदान आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना

मुफ्त इलाज से बच्चों की जिंदगी में लौटी खुशियाँ

437 से अधिक बच्चों के सफल हृदय ऑपरेशनयोजना का लाभ निरंतर जारी

दमोह : 02 अप्रेल 2026

            प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही हैं, इस योजना के माध्यम से गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों को समय पर उपचार मिलता है, जिससे उनका जीवन सुरक्षित हो रहा है। मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत जिले में अब तक 437 से अधिक बच्चों के हृदय के ऑपरेशन सफलतापूर्वक कराए जा चुके हैं।  ग्राम पिपरिया साहनी के अमन आदिवासी (9 वर्ष) एवं दिव्यांशी कुचवंदिया (8 वर्ष) निवासी जबलपुर नाका दमोह को भी योजना का लाभ दिया गया और जटिल ऑपरेशन पूर्णतः नि:शुल्क कराए गये, आज यह बच्चे पूर्णरूप से स्वस्थ्य होकर परिवार में खुशियां बांट रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर का निरंतर सहयोग प्राप्त होता है, जिससे बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

            ग्राम पिपरिया साहनी की संगीता आदिवासी बताती हैं उनका बच्चे अमन आदिवासी (9 वर्ष) का शासन की योजना के अंतर्गत पूरा उपचार और सर्जरी निःशुल्क की गई। सर्जरी सफल रहने के बाद अब बच्चा पूर्णतः स्वस्थ है और किसी प्रकार की समस्या नहीं है। उनके पुत्र अमन आदिवासी को जन्म से ही कई स्वास्थ्य समस्याएँ थीं। बच्चे को बार-बार बुखार आना, सर्दी रहना, कान बहना तथा शरीर का नीला पड़ना जैसी गंभीर परेशानियाँ बनी रहती थीं। परिवार ने कई बार उपचार करवाया, लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। स्थिति गंभीर होने पर बच्चे को जिला अस्पताल दमोह में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों की सलाह पर उसे DEIC में दिखाया गया। यहाँ जांच के बाद बच्चे को बेहतर उपचार हेतु भोपाल रेफर किया गया, जहाँ चिरायु हॉस्पिटल में उसका इलाज किया गया। संगीता आदिवासी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि यदि यह योजनाएँ न होती तो इतना महंगा इलाज कराना संभव नहीं था।

            जबलपुर नाका निवासी बावले कुचबंदिया बताते हैं उनकी पुत्री दिव्यांशी कुचबंदिया उम्र (8 वर्ष) के हृदय में छेद की गंभीर समस्या थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उपचार कराना कठिन था, लेकिन शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बालिका का पूर्णतः निःशुल्क उपचार संभव हो सका। उनका कहना है जिला अस्पताल की डीआईसी टीम द्वारा आवश्यक सभी दस्तावेज तैयार कराए गए तथा उपचार हेतु बालिका को चिरायु हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहाँ विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सफल इलाज किया गया। उपचार के दौरान किसी प्रकार का कोई खर्च नहीं हुआ, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली।

बावले कुचबंदिया मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के बारे में कहते हैं गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना के माध्यम से गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों को समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे उनका जीवन सुरक्षित हो रहा है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी जनहितकारी योजनाएं निरंतर संचालित होती रहनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार इसका लाभ उठा सकें।

            जिला अस्पताल दमोह में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जलज बजाज ने बताया कि वे डीआईसी नोडल ऑफिसर एवं एसएनसीयू इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों को विभिन्न बीमारियों का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना की विशेषता यह है कि कई जटिल ऑपरेशन भी पूर्णतः नि:शुल्क कराए जाते हैं, डीआईसी टीम मैनेजर नरेश राठौड़, सोशल वर्कर हर्ष, संदीप सहित अन्य सदस्य शामिल है, लगातार ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें शीघ्र उपचार दिलाने का कार्य कर रहे है।

            डॉ. श्री बजाज बताते हैं अमन आदिवासी (9 वर्ष), जो ग्राम पिपरिया साहनी से है, लंबे समय से इलाज करा रहा था लेकिन सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा था। डीआईसी टीम द्वारा उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां जांच में हृदय में छेद की समस्या सामने आई। इसके बाद उसका निःशुल्क ऑपरेशन चिरायु अस्पताल भोपाल में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत कराया गया। वर्तमान में बच्चा पूर्णतः स्वस्थ है और उसकी ग्रोथ भी बेहतर हो रही है।

            इसी प्रकार जबलपुर नाका दमोह निवासी दिव्यांशी कुचवंदिया (8 वर्ष) का भी नवंबर 2025 में हृदय का सफल ऑपरेशन इसी योजना के माध्यम से किया गया। अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रही है।

            डॉ. श्री बजाज ने प्रदेश में उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार उपचार कराया जाता है, जबकि जटिल मामलों में मरीजों को मुंबई जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों में भी भेजा जाता है, इस योजना का लाभ लेने के लिए कोई विशेष पात्रता (क्राइटेरिया) नहीं है और यह सभी बच्चों के लिए निःशुल्क उपलब्ध है। डॉ.कहते हैं यदि किसी बच्चे में गंभीर बीमारी के लक्षण दिखाई दें या जानकारी हो, तो उसे तत्काल जिला अस्पताल या डीआईसी तक पहुंचाएं, जिससे समय पर उपचार मिल सके।

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