
दमोह। ’चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से उनके परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री श्रुतेश सागरजी एवं मुनि श्री सुश्रुत सागर जी महराज’ के मंगल सानिध्य एवं कर कमलों से दीक्षार्थी श्रीमती केशरबाई पत्नी स्व. सुखलाल जैन कि भव्य छुल्लिका दीक्षा संपन्न हुई श्री विद्या सागर वृत्ती आश्रम सिविल वार्ड मैं संपन्न इस दीक्षा कार्यक्रम में उनके सुपुत्र पुरानचंद अनिल कुमार ऋषभ कुमार एवं सुपुत्री श्रीमती आशा सिंघई परिवार के परिजनों के अलावा दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई, वृत्ति आश्रम अध्यक्ष रूपचंद जैन, मोती गोयल उपाध्यक्ष, रिंकू सिंघई श्रावक कल्याण समिति के महामंत्री सुनील वेजीटेरियन विनय विनम्र विकल्प जैन, दीपक जैन शिक्षक राजेश वकील, दिनेश दीक्षा के अलावा बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रही इस अवसर पर मुनि श्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि जब दीक्षार्थी की मृत्यु निकट होती है और वह गुरु से दीक्षा की इच्छा करता है तो उसे दीक्षा प्रदान की जाती है। गुरु कृपा से दीक्षार्थी सात आठ भव के बाद ही मोक्ष की प्राप्ति कर लेता है मनुष्य भव में ही दीक्षा संभव है जब तक इच्छा रहती है तब तक दीक्षा संभव नहीं होती जब सभी इच्छाएं समाप्त हो जाती हैं मात्र मोक्ष की इच्छा होती है तभी दीक्षा सार्थक होती है एक उम्र के बाद सब कुछ छोड़ना पड़ता है मृत्यु सब कुछ छुड़ा लेती है जो छोड़ नहीं पाता उसे रागी कहते हैं और जो छोड़ देता है उसे त्यागी कहते हैं भक्त भावना से भगवान बन जाता है।


