जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा थाना पटेरा अंतर्गत ग्राम महेवा निवासी 17 वर्षीय किशोरी की मृत्यु के प्रकरण में संज्ञान में आयी खबर पर संयुक्त कार्यवाही करते हुए संबंधित निजी चिकित्सकीय संस्थान जीवन-ज्योति अस्पताल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण मेडिकल टीम एवं थाना पटेरा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया ।
मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पटेरा से प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार मृतिका को 21 मई की रात्रि लगभग 1 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पटेरा लाया गया था, जहॉ ड्यूटी चिकित्सक द्वारा परीक्षण उपरांत उसे मृत घोषित किया गया । इसके पश्चात थाना पटेरा को सूचना दी गई तथा पुलिस प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत पोस्टमार्टम कराया गया। मृतिका के परिजनो द्वारा शिकायत की गई थी कि उपचार डॉ. लीलाधर चौधरी द्वारा किया गया था। शिकायत के आधार पर संबंधित चिकित्सीय संस्थान जीवन-ज्योति अस्पताल का निरीक्षण किया गया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताए पायी गई।
जॉच के दौरान प्रस्तुत शैक्षणिक योग्यता ’’बी.ई.एम.एस.’’ अर्थात बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी पायी गई, जो मध्यप्रदेश चिकित्सा व्यवसाय संबंधी नियमों के अंतर्गत एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में उपचार हेतु मान्य नहीं है। संबंधित चिकित्सक का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में किसी प्रकार का वैध पंजीयन भी उपलब्ध नहीं पाया गया। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि संस्थान में बॉयो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन एवं आवश्यक व्यवस्थाऍ एवं संबंधित प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं थे। इससे जैव चिकित्सीय अपशिष्ट के अनुचित निस्तारण की आशंका व्यक्त की गई। समस्त दस्तावेज एवं व्यवस्थाए नियमानुसार न पाए जाने पर मेडिकल टीम द्वारा संबंधित क्लीनिक को नियमानुसार सील कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजन से अपील की गई है कि उपचार हेतु केवल विधिवत पंजीक्त एवं मान्यता प्राप्त चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थानों से ही चिकित्सा सेवाए प्राप्त करें।



