स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा पीएमएसएमए के तहत 433 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य जांच-नैदानिक परीक्षण कर समुचित उपचार सेवा दी गई

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सिविल अस्पताल हटा सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उपस्वास्थ्य केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं हेतु विशेष स्वास्थ जांच एवं परमार्श क्लीनिक लगाये गये। अभियान का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चत करना है।
क्लीनिक दौरान जिले भर में सामान्य एवं जोखिम युक्त 433 गर्भवती महिलाओ की जॉच स्त्री रोग विशेषज्ञ/स्किल लैब प्रशिक्षित चिकित्सक की उपस्थिति में की गई। इस दौरान गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जॉच, फॉलोअप परीक्षण आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं जोखिम आधारित उपचार प्रदान किया गया ।
विशेष स्वास्थ्य क्लीनिक में स्वास्थ्य लाभ लेने पहुची गर्भवती महिलाओं की सुविधा का भी खास-ख्याल रखा गया। गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच-परीक्षण के लिए पृथक से ओ.पी.डी.काउण्टर, सुविधापूर्ण बैठक एवं पेयजल व्यवस्था तथा पौष्टिक स्वल्पाहार की व्यवस्था भी बनाई गई ।
वरिष्ठ स्त्री रोग एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता त्रिवेदी ने सिविल अस्पताल हटा में आयोजित विशेष स्वास्थ्य क्लीनिक में जोखिम वाली 15 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी जॉच एवं अन्य गर्भवती का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श प्रदान किया गया। इसी तरह स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रद्धा गंगेले ने सामुदायिक केन्द्र जबेरा, पथरिया सामुदायिक केन्द्र में डॉ. प्रियंका छाबडा, पटेरा में डॉ. गीतांजलि सिदद्म, बटियागढ़ में डॉ. मेघना श्रीवास्तव, तेन्दूखेडा़ में डॉ. मिताली हेरिसन।
सभी गर्भवती को गर्भावस्था दौरान संतुलित आहार, नियमित जॉच, संस्थागत प्रसव एवं सावधनियो संबंधी आवश्यक स्वास्थ्य शिक्षा भी दी गई। साथ ही अनीमिया से बचाव में उपयोगी आयरन टेबलेट एवं गर्भावस्था दौरान रक्तचाप को नियंत्रित करने और जच्चा-बच्चा की हड्डियों को मजबूत बनाने में बेहद उपयोगी कैल्शियम टैबलेट का निःशुल्क वितरण भी किया गया। समुदाय स्तर पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उप-स्वास्थ्य केन्द्रों पर पंजीकृत महिलाओं की जॉच मेडिकल चिकित्सक एवं सीएचओ द्वारा की गई। गर्भावस्था दौरान उभरने वाले जोखिमों की पहचान कर आवश्यक रेफरल एवं उपचार सुनिश्चित किया गया।



