राघव दास जी ने बताया अजबधाम का महत्व, जय-जय सरकार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश अजबधाम में संत समागम के दौरान पुस्तक ‘गूढ़ भागवत कथा’ भेंट की, भक्ति मार्ग को सरल बनाने का संदेश अजब धाम में संतों को भेंट की पंडित रामदास चौबे द्वारा रचित पुस्तक ‘गूढ़ भागवत कथा’ का संतों को भेंट, भक्ति मार्ग को सरल बनाने वाला ग्रंथ
राघव दास जी ने बताया अजबधाम का महत्व, जय-जय सरकार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश अजबधाम में संत समागम के दौरान पुस्तक ‘गूढ़ भागवत कथा’ भेंट की, भक्ति मार्ग को सरल बनाने का संदेश अजब धाम में संतों को भेंट की पंडित रामदास चौबे द्वारा रचित पुस्तक ‘गूढ़ भागवत कथा’ का संतों को भेंट, भक्ति मार्ग को सरल बनाने वाला ग्रंथ


दमोह/अजबधाम। तपोस्थली अजबधाम में छोटे सरकार राम अनुग्रह दास जी के पावन सानिध्य में भव्य संत समागम का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे संत-महापुरुषों, विद्वानों और श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान वैदिक परंपराओं, संत संस्कृति और अजबधाम की आध्यात्मिक महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। समागम को संबोधित करते हुए अयोध्याधाम के पीठाधीश्वर राघव दास जी ने अजबधाम को अत्यंत पवित्र तपोभूमि बताते हुए कहा कि यह वही स्थल है, जहां जय जय सरकार ने कठोर तपस्या कर मानव मात्र को भगवत प्राप्ति और भक्ति के मार्ग का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संत जय जय सरकार की आध्यात्मिक परंपरा और विचारधारा को आज राम अनुग्रह दास जी पूरी निष्ठा और साधना के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे अजबधाम निरंतर साधकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है। इस अवसर पर दमोह के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी, पालीटेक्निक कॉलेज के विद्वान रामदास चौबे द्वारा रचित आध्यात्मिक ग्रंथ गूढ़ भागवत कथा की प्रतियां संत-महापुरुषों को भेंट की गईं। पुस्तक भेंट करने का कार्य उनके पुत्र जमना प्रसाद चौबे द्वारा किया गया। पुस्तक प्राप्त कर संतों ने लेखक के प्रयासों की सराहना की और इसे साधना-पथ पर अग्रसर जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी बताया।
पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए राघव दास जी ने कहा कि गूढ़ भागवत कथा भगवान के गहन और सूक्ष्म रहस्यों को उजागर करने का सार्थक प्रयास है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार कोलंबस ने नई दुनिया की खोज की, उसी प्रकार शास्त्रों में छिपे हुए जिन तत्वों को सामान्य दृष्टि नहीं देख पाती, उन्हें सामने लाने वाला ज्ञान ‘गूढ़’ कहलाता है। यह ग्रंथ शास्त्रीय आधार पर परमात्मा के चिंतन, भक्ति और जीवन-दर्शन को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह पुस्तक न केवल साधकों के लिए, बल्कि विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। गूढ़ भागवत कथा भक्ति मार्ग को सहज, सरल और व्यवहारिक रूप में समझाने का कार्य करती है, जिससे सामान्य जन भी भगवान की भक्ति से जुड़ सकें। कार्यक्रम के अंत में संतों ने लेखक के दीर्घायु और निरंतर लेखन साधना की कामना की तथा अजबधाम की आध्यात्मिक परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।


