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मध्य प्रदेश में जल संरक्षण बना जन-जन का अभियान- राज्यमंत्री श्री लोधी जल संरक्षण को जीवन पद्धति बनाना होगा- पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष डॉ. कुसमरिया सिंचाई परियोजनाओं से बदली दमोह की तस्वीर, किसानों की आय बढ़ी- विधायक श्री मलैया प्रदेशभर में 3.62 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण, 10,514 करोड़ रुपये की लागत से जल संसाधनों के संरक्षण को मिली नई गति दमोह स्थित बेलाताल में हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन

 मध्य प्रदेश में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 के अंतर्गत प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किए गए हैं। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखकर समाज का संस्कार बनाना है, प्रदेश प्राकृतिक जल स्रोतों से समृद्ध है, लेकिन बदलते जलवायु चक्र, भूजल के अत्यधिक दोहन तथा जल प्रबंधन के प्रति बढ़ती असावधानी को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। इसी दृष्टि से आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन को सुदृढ़ किया जा रहा है, इस आशय के विचार प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन अवसर पर बेलाताल में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में व्यक्त किये।

            राज्यमंत्री श्री लोधी ने कहा जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 के अंतर्गत प्रदेशभर में लगभग 3 लाख 62 हजार जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों का क्रियान्वयन किया गया है। इन कार्यों पर लगभग 10,514 करोड़ रुपये की लागत आई है, अभियान के तहत हजारों खेत तालाब, भू-जल रिचार्ज संरचनाएं, अमृत सरोवर, चेक डैम, जलाशयों का जीर्णोद्धार, नालों की सफाई, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा जल संरक्षण संबंधी जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की गई हैं। इसके साथ ही वन क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है, उन्होने कहा प्रदेश सरकार का उद्देश्य जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधनों का निर्माण करना तथा सतत विकास की दिशा में मजबूत आधार तैयार करना है।

            मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा जब तक जल संरक्षण को हम अपनी जीवन पद्धति में आत्मसात नहीं करेंगे और अपनी आदतों में सुधार नहीं लाएंगे, तब तक जल संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है, उन्होंने कहा पूर्व समय में खेत-तालाब, रामताल एवं अन्य पारंपरिक जल स्रोत जल संरक्षण के प्रभावी माध्यम थे। वर्तमान में शासन द्वारा अमृत सरोवर जैसी योजनाओं के माध्यम से जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।

            दमोह विधायक जयंत मलैया ने कहा आज दमोह जिला पानी से लबालब है और सिंचाई परियोजनाओं के सकारात्मक परिणाम किसानों के जीवन में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा सीतानगर, पंचमनगर और सतधरू जैसी सिंचाई परियोजनाओं के कारण क्षेत्र में खेती की तस्वीर बदल गई है, उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से कृषि भूमि के मूल्य में लगभग पाँच गुना तक वृद्धि हुई है। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से किसान अब वर्ष में तीन फसलें ले रहे हैं।

            जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए धन्यवाद देते हैं जो इस अभियान को प्रारंभ कराया। हमें गर्व है कि जिले में अभियान के तहत बहुत ही अच्छा काम हुआ सभी संस्थाओं, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया और जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए कार्य किया।

            जिला पंचायत उपाध्यक्ष डॉ. मंजू धर्मेंद्र कटारे ने कहा जब तक सभी लोग एक साथ काम नहीं करेंगे तब तक काम नहीं बनेगा, और जब तक हम अपनी सोच नहीं बदलेंगे तब तक कुछ नहीं बदलेगा, इसलिए हम सभी को अपनी सोच बदलकर दूसरों को सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करें।

            मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दमोह प्रवीण फुलपगारे ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से शुरू हुआ था और 30 जून को समाप्त करना था, कार्यक्रम के तहत जलस्रोतों को सुरक्षित करने में लोगो की जागरूकता और सहभागिता बनानी थी और जन जागरूकता फैलानी थी, मुझे बताते हुए यह खुशी है की जल संवर्धन की रैंकिंग में हमारा दमोह जिला 17 वे नंबर पर है।

            इस अवसर पर जल गंगा संवर्धन अभियान में श्रेष्ठ कार्य करने वालो का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया। इसमें स्वयंसेवी संस्थाऍ, शिक्षक और अन्य लोग शामिल रहे। इस दौरान जल संवर्धन-संरक्षण की शपथ दिलाई। कार्यक्रम का संचालन विपिन चौबे और आभार सुशील नामदेव ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सीईओ जिला पंचायत प्रवीण फुलपगारे ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक जयंत मलैया, म.प्र. राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, उपाध्यक्ष मंजू धर्मेन्द्र कटारे, गोपाल पटेल, अमित जैन (गोलू बजाज), रामेश्वर चौधरी, संजय यादव, राघवेन्द्र सिंह परिहार, कविता राय, संतोष रोहित सहित अन्य जनप्रतिनिधि गणमान्य नागरिक, सम्मानीय मीडियाजन, अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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