दमोह के ‘पड़रिया थोबन’ ने रची विकास की नई इबारत स्मार्ट विलेज के बाद अब बना ‘पर्यटन ग्राम’ पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन में संवर रहा है जबेरा ब्लॉक का यह गांव गांव में बनेंगे कुल 10 होमस्टे पारंपरिक चूल्हे के देसी स्वाद और ग्रामीण संस्कृति के दीवाने हो रहे पर्यटक भीषण गर्मी में भी पहुंच रहे पर्यटक सोशल मीडिया पर लाखों लोग देख रहे गांव के वीडियो

बुंदेलखंड क्षेत्र के दमोह जिले में जबेरा ब्लॉक इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी अपनी अनूठी व्यवस्थाओं के लिए ‘स्मार्ट गाँव का तमगा हासिल करने वाला गांव पड़रिया थोबन अब एक कदम और आगे बढ़कर ‘पर्यटन ग्राम’ के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर चुका है। प्रदेश के पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेंद्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन तथा मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड (MPTB) के सहयोग से इस गांव को ग्रामीण पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
घर जैसा अहसास बन रहे हैं होमस्टे
पर्यटन विभाग की योजना के तहत गांव में 10 होमस्टे बनाए जाने का लक्ष्य है, जिससे पर्यटकों को पूरी तरह ग्रामीण परिवेश का अनुभव मिल सके। वर्तमान में यहाँ 2 होमस्टे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जबकि 3 अन्य होमस्टे बहुत जल्द बनकर तैयार होने वाले हैं। होमस्टे निर्माण और पर्यटन गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी एमपीटीबी द्वारा मानव जीवन विकास समिति को सौंपी गई है, जो ग्रामीणों के साथ मिलकर इस परियोजना को जमीन पर उतार रही है।
चूल्हे की रोटी का जादू
आमतौर पर गर्मियों में पर्यटक पर्यटन स्थलों से दूरी बनाते हैं, लेकिन पड़रिया थोबन में इसके विपरीत नजारा है। इस भीषण गर्मी में भी पर्यटक रोजाना गांव का रुख कर रहे हैं। पिछले दो महीनों में ही यहाँ लगभग 20 से 25 परिवार होमस्टे का लुत्फ उठा चुके हैं। इसके अलावा, हर हफ्ते 50 से अधिक पर्यटक अपने परिवार और दोस्तों के साथ सिर्फ गांव घूमने आ रहे हैं। कई पर्यटक यहाँ बच्चों का जन्मदिन मनाने पहुंच रहे है, तो कई पर्यटक शहरी भागदौड़ से दूर सुकून के पल बिताने।
क्यों खास बन रहा है पड़रिया थोबन
पर्यटकों के कदम खींचने की सबसे बड़ी वजह बुन्देलखंड की संस्कृति और खान-पान है। पर्यटकों के गांव पहुंचने पर ग्रामीण पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर पर्यटकों का स्वागत करते हैं। वहीं, मिट्टी के चूल्हे पर बना शुद्ध देसी बुंदेली भोजन पर्यटकों को सबसे ज्यादा आर्कषक और लुभावना बना रहा है।
रोजगार के खुले द्वार, सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज
ग्रामीण पर्यटन विशेषज्ञ अनुज बाजपेयी ने बताया कि इस पहल से गांव के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। ग्रामीण पर्यटन ने स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए और बेहतरीन अवसर पैदा किए हैं। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर भी इस गांव का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है; पड़रिया थोबन के वीडियो को इंटरनेट पर लाखों की संख्या में लोग देख रहे हैं, जिससे गांव को देश-दुनिया में एक अलग पहचान मिल रही है।
मानसून और ठंड में उमड़ेगा पर्यटकों का सैलाब
शुरुआती दौर में ही पड़रिया थोबन गांव को जैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है, उससे प्रशासन और ग्रामीण बेहद उत्साहित हैं। आगामी बारिस (मॉनसून) और ठंड के मौसम में यहाँ प्राकृतिक संदरता और निखरेगी, जिससे पर्यटकों की संख्या में कई गुना तेजी से बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है।
