
रासायनिक खेती के दौर में ग्राम बाँसाकलां के एक छोटे किसान ने यह साबित कर दिया है कि कम जमीन पर भी जैविक खेती के जरिए बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। सीमांत किसान परसादी पटेल (पिता पर्वत पटेल) मात्र 0.98 हेक्टेयर भूमि में जैविक पद्धति अपनाकर क्षेत्र के लिए प्रेरक बन रहे। श्री पटेल ने यूरिया और डीएपी का मोह छोड़ दिया है। वे बाजार से खाद खरीदने के बजाय घर पर ही केंचुए की खाद तैयार करते हैं उनके खेत में सब्जी चना, उड़द और गेहूं की जैविक पैदावार ली जा रही है। जैविक उत्पाद होने के कारण उन्हें सामान्य फसलों की तुलना में जैविक गेहूं 3000 रूपये प्रति क्विंटल और जैविक उड़द 6800 रूपये प्रति क्विंटल दाम मिल रहे हैं।
सहायक संचालक जेएल प्रजापति ने बताया जैविक खेती को बोझ न समझें। इसकी शुरुआत छोटे रकबे से करें और अनुभव होने पर इसे धीरे-धीरे बड़े स्तर पर ले जाएं। इससे मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और लागत भी कम होगी।



