पी.एम.यू.एम. शिक्षक संघ अपनी दूसरी मांग ‘कैशलेस हेल्थ कार्ड’ की सफलता की ओर अग्रसर
दमोह। पी.एम.यू.एम. शिक्षक संघ के प्रांत संयोजक पवन खरे ने बताया कि संघ द्वारा मध्य प्रदेश के समस्त कर्मचारियों के लिए भारत के अन्य राज्यों की भांति केंद्रीय वेतनमान लागू करने की मांग लगातार उठाई जा रही है। इसके साथ ही संघ की दूसरी प्रमुख मांग मध्य प्रदेश के सभी कर्मचारियों के लिए कैशलेस हेल्थ कार्ड योजना लागू करने की रही है, जिसे पिछले तीन वर्षों से निरंतर प्रमुखता से उठाया जा रहा है। इन दोनों महत्वपूर्ण मांगों को लेकर संघ के सभी जिला अध्यक्षों द्वारा अपने-अपने जिलों में सतत प्रयास किए गए। आदरणीय कलेक्टर महोदय, स्थानीय विधायक, शिक्षा मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री के नाम लगातार ज्ञापन सौंपे गए। इसी क्रम में पी एम यू एम शिक्षक संघ द्वारा दमोह में आयोजित छात्र-शिक्षक प्रतिभा सम्मान समारोह के मंच पर उपस्थित पर्यटन एवं संस्कृति विभाग मंत्री माननीय धर्मेंद्र सिंह लोधी जी पशुपालन एवं दुग्ध विभाग मंत्री माननीय लखन पटेल जी पूर्व वित्त मंत्री माननीय जयंत मलैया जी हटा विधायक श्रीमती उमादेवी खटीक जी जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सभी जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी इन मांगों को प्रमुखता से रखा गया, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष मांगें रखने एवं उनके निराकरण का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, दमोह जिले के बांदकपुर में आयोजित जागेश्वर नाथ कॉरिडोर के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान भी प्रांत संयोजक पवन खरे द्वारा माननीय मुख्यमंत्री को केंद्रीय वेतनमान एवं कैशलेस हेल्थ कार्ड की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।
संघ के इन निरंतर प्रयासों एवं संघर्ष का सकारात्मक परिणाम सामने आया, जब माननीय मुख्यमंत्री द्वारा कैशलेस हेल्थ कार्ड योजना की घोषणा की गई। यह पी.एम.यू.एम. शिक्षक संघ के संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब संघ अपनी प्रमुख मांग मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को अन्य राज्यों की भांति केंद्रीय वेतनमान प्रदान करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। इस दिशा में संस्थापक सतीश खरे, प्रांत अध्यक्ष मुरली मनोहर अरजरिया, सह-संस्थापक ब्रजेश असाटी, प्रांत महासचिव मुकेश नेमा, प्रांत महामंत्री विनोद राठौड़, प्रांतीय प्रवक्ता रमाशंकर तिवारी सहित सभी प्रांतीय, संभागीय एवं जिला पदाधिकारी तथा सक्रिय सदस्य निरंतर संघर्षरत हैं। संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक कर्मचारियों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता, यह संघर्ष इसी प्रकार जारी रहेगा।


