हिन्दी लेखिका संघ ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एवं होली मनाई
हिन्दी लेखिका संघ ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एवं होली मनाई
दमोह। हिन्दी लेखिका संघ दमोह की बहनों ने देव गंगा जरारूधाम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एवं होली मनाई। बस में जाते आते समय बहनों ने जी भर कर अंताक्षरी खेली, फिर जरारू धाम के झरने एवं प्राकृतिक सौंदर्य के बीच पिकनिक का आनंद लिया। द्वितीय चरण में डॉ प्रेमलता नीलम के मुख्य आतिथ्य, नर्मदा सिंह एकता के विशिष्टातिथ्य में मां सरस्वती के दीप प्रज्वलन, पूजन बीच स्वास्ती वाचन संगीता पान्डे ने किया। सरस्वती वंदना डॉ प्रेमलता नीलम प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन पुष्पा चिले ने किया। आभार लता गुरु व्यक्त किया। नारी और होली रंगीन बौछारों की काव्यांजलि इस प्रकार रही। पुष्पा चिले ने कहा नारी की गरिमा स्वीकारो ,निज निर्मित उसकी महिमा को किसी पुरुष से कम न आंको। रंग रंगीला यह समां, उपवन उड़े गुलाल, रंगों के इस कुंड में सखियां हैं बेहाल डॉ प्रेमलता नीलम ने पढ़ा नारी का अस्तित्व महान है, नारी आन बान शान है, नारी अन्याय पर झुकती नहीं, नारी न्याय पर सुजान है। सुनंदा जैन उम्र हो गई सत्तर के पार,हो गया है सभी रंगों से प्यार। वसुन्धरा तिवारी देवी का अवतार है नारी,मां की ममता उसमें रहती शक्ति स्वरूपा कहलाती नारी। वसुन्धघरा तिवारी$मुझे मिल गया नंद का लाल होली में। आराधना राय प्रेम भलाई एकता मेल संयम का त्यौहार है होली। उन्मुक्त गगन में निश्छल और स्वतंत्र उड़ना चाहती है नारी।भावना शिवहरे मतवाली होली देख खिले जब नाते, मिटते गिले शिकवे गले मिल जाते। संगीता पान्डे मुट्ठी भर गुलाल लायो, केशर रंग पिचकारी, प्यार के रंग में रंग गये ऐसे देखे दुनिया सारी। माया यादव होली के हों रंग अनेक,बस तुम रहना रंग एक। टूटी हुई चीज़ों की अहमियत होती है,बस महिला ही टूटकर मजबूत होती है। डॉ रेवा चौधरी होली केवल त्यौहार नहीं यह आत्मा का विस्तार,जब समरसता के सागर में डूब जाये संसार। इस दुनिया की शान है नारी धीरज प्रमाण है नारी। उमा नामदेव परिस्थितियों से जूझती निरंतर राह खोजती चेहरे पर नहीं शिकन नारी तुझे शत् शत् नमन। मौज मस्ती का ख़ूब रंग चढ़ा होली में। पद्मा तिवारी -हर काम अधूरा नारी बिन है,हर दिन ही नारी का दिन है।सुनले मेरी बात सांवरिया,तोरे रंग रांगी मोर चुनरिया। कमलेश शुक्ला शिव सा गरल पान है करती फिर भी पुरुष प्रधान समाज में उसकी क्या हस्ती। रिश्तों में मर्यादा रहने दो, होली को होली रहने दो। प्रेमलता उपाध्याय अपने आंसुओं को कब तक छिपाओगी नारी कब तक बनी रहोगी यूं बेचारी। फागुनी बयार चले मन में खुमार उठे। लता गुरु ने कहा होली आई रंग बिरंगी, हंसी उल्लास लिए अपार।नारी तेरे रूप अनेक, ब्रह्मांड की हस्ती तुम, देवी, शक्ति, सृष्टि तुम। नर्मदा सिंह एकता, भारती राय, मन्दाकिनी बेन, शिवकुमारी शिवहरे, अंजना तिवारी, सीमा जैन, रमा उपाध्याय, आन्या तिवारी, भावना पटेल आदि बहनों ने भी काव्यांजलि प्रस्तुत की।

