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मध्य प्रदेश
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श्री समोशरण महामंडल विधान में 64 रिद्धि मंत्रो के अर्घ्यं मुनि श्री पदम सागर जी के सानिध्य में समर्पित किए

श्री समोशरण महामंडल विधान में 64 रिद्धि मंत्रो के अर्घ्यं मुनि श्री पदम सागर जी के सानिध्य में समर्पित किए

दमोह। सकल जैन समाज के द्वारा श्री नंदी मंदिर निर्माण कार्यार्थ श्री 24 समोशरण अरहंत चक्र महामंडल विधान का आयोजन उमा मिस्त्री की तलैया में चल रहा है। विधान के पांचवें दिन मुनि संघ के सानिध्य में 64 रिद्धि मंत्रो के अर्घ्यं चढ़ाए गए। संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समय सागर जी की मंगल प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उनके शिष्य मुनिश्री पदम सागर एवं छुलल्क श्री तात्पर्य सागर जी जे सानिध्य में 3 मार्च तक चलने वाले इस भव्य आयोजन के पांचवें दिन शनिवार को पूर्व वित्त मंत्री और दमोह विधायक श्री जयंत मलैया कुंडलपुर कमेटी के अध्यक्ष श्री चंद्र कुमार सराफ सहित अनेक गणमान्य जन ने शामिल होकर मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त कियज्ञं प्रातः बेला में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी दीपक भैया सुरेश शास्त्री अभिषेक शास्त्री मोनू भैया स्वतंत्र भैया आदि के निर्देशन में श्री जी का अभिषेक शांति धारा पूजन संपन्न हुआ। आज मुख्य शांति धारा करने के साथ श्रावक श्रेष्ठि बनकर समोशरण में पूजन का सौभाग्य राकेश पुजारी परिवार, आनंद बीएसएनल परिवार, लोकेश गांगरा परिवार, डॉ सुबोध जैन परिवार को प्राप्त हुआ। रविवार को शांति धारा का सौभाग्य विमल कुमार जैन बटियागढ़ वाले परिवार सहित अन्य परिवारों ने प्राप्त किया है।
उज्जैन से भट्ठारक जी का हुआ आगमन- विधान अवसर पर उज्जैन से पधारे भट्ठारक जी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी की अनमोल कृति मुकमाटी का अरबी भाषा में रूपांतरण किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक 17 भाषाओं में इस ग्रंथ का रूपांतरण किया जा चुका है अगले माह दुबई में अरबी भाषा में इसको लेकर एक बड़ी सेमिनार हो रही है। नेपाली भाषा में भी मुकमाटी ग्रन्थ का रूपांतरण होने तथा नेपाल में भी एक बड़े आयोजन की उन्होंने जानकारी दी। इस अवसर पर विधान समिति द्वारा जी का स्वागत अभिनंदन किया गया। पांचवें दिन के विधान अवसर पर मुख्य समोशरण के साथ 24 गन्ध कुटियो में भक्ति भाव के साथ 64 रिद्धि मंत्रो के अर्घ्य महा पत्रों के साथ 24 सोधर्म इंद्र परिवार एवं इंद्र इंद्राणियों द्वारा समर्पित किए गए। तत्पश्चात भगवान आदिनाथ से लेकर शीतल नाथ तक 10 पूजाएं संपन्न हुई। विधान के छठवें दिन रविवार भगवान श्री श्रेयांश नाथ लेकर भगवान महावीर तक की 14 पूजन के साथ अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। शनिवार को संध्या आरती का सौभाग्य राकेश पुजारी परिवार को प्राप्त हुआ वहीं शुक्रवार रात संध्या आरती का सौभाग्य जैन पंचायत के महामंत्री पदम जैन खली के साथ जैन पंचायत की टीम एवं सकल हिंदू समाज के अध्यक्ष कपिल सोनी के साथ पूरी टीम को प्राप्त हुआ।
अनेक मंदिरों से विधान हेतु द्रव्य सामग्री एवं राशि आई- शनिवार को विधान अवसर पर सिविल वार्ड भाई जी मंदिर के आसामियों ने अध्यक्ष पवन चश्मा वालों के साथ द्रव्य समर्पित करते हुए दो लाख रुपए की नगद राशि नन्हें मन्दिर हेतु प्रदान की। मलैया मील मंदिर तथा पलन्दी मन्दिर के आसामियों ने भी द्रव्य सामग्री समर्पित की। मलैया मील मन्दिर कमेटी द्वारा भी नन्हे मंदिर निर्माण हेतु 200000 की राशि दिए जाने की घोषणा की गई।
मुनि श्री के प्रेरणा से अनेक दानदाताओ ने की घोषणा- विधान समिति के संयोजक महेष दिगंबर ने बताया कि मुनि श्री पदम सागर जी महाराज की प्रेरणा से नन्हे मंदिर निर्माण कार्य एवं 24 में मूर्ति स्थापना हेतु अनेक श्रावक परिवारों ने ग्यारह ग्यारह कलष की दान राषि की घोशणाएं की। जिनमे कमलारानी भूपेंद्र जितेंद्र जित्तू परिवार, ब्र.अपूर्वा दीदी पिपरिया वाला परिवार तथा रूपचंद नवीन निराला परिवार के द्वारा एक-एक मूर्ति स्थापना की घोशणा करते हुए मुनि श्री का आषीर्वाद प्राप्त किया। इसके पूर्व कल पं सुरेष षास्त्री, सुनील बडेराय एवं धरम जैन अमित महावीर प्रिंटर्स के द्वारा भी एक मूर्ति स्थापना की घोशणा की गई थी। षनिवार को मंदिर के स्तंभ निर्माण हेतु राजेंद्र कुमार पवन बमोरिया परिवार के द्वारा दान राषि की घोशणा की गई। इसके अलावा निर्माणधीन मंदिर के मंडप एवं पिलर सहित निर्माण सामग्री हेतु दान राषि की घोशणा भी अनेक दानदाताओं द्वारा की गई।
समवषरण में बैठने का सौभाग्य पुण्यषाली जीवों को ही मिलता है-मुनि श्री पदम सागर जी- अरिहंत चक्र महामंडल विधान अवसर पर भगवान के समवशरण की महिमा का बखान करते हुए मुनिश्री पदम सागर महाराज ने कहा कि कल इस समवशरण में बैठकर प्रवचन देने में ऐसी अनुभूति हुई की आंखों में आंसू आ गए। जब यहा पर यह हालत है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि भगवान के साक्षात समवशरण में क्या स्थिति बनती होगी। मुनिश्री ने कहा कि भगवान के समवशरण में सभी जीवो को स्थान मिलता है सबका कल्याण होता है इसी तरह इस समोशरण महामंडल विधान में बैठकर पूजन अर्चन के साथ दान करने वाले लोग निश्चित रूप से सौभाग्यशाली है जो जो अष्टानीका जैसे महापर्व में यह विधान करके अपने इस भव को और अगले भव को सुधार रहे हैं। मुनि श्री ने भगवान महावीर समोशरण में लगातार 64 दिन भगवान की दिव्य देशना नही हो पाने तथा इसके बाद सौधर्म इंद्र द्वारा गौतम स्वामी को समोशरण में लाने, मानस्तंभ को देखते ही गौतम कवमान समाप्त हो जाने, उनके द्वारा भगवान के चरणों में वस्त्र त्याग कर पंच मुश्ठि से केश लुंच कर मुनि दीक्षा ग्रहण करने के प्रसंग को सुनते हुए कहा कि पात्रता के बिना कोई भी कार्य नहीं होता। उन्होंने कहा कि जिस तरह से शेरनी के दूध को रखने के लिए स्वर्ण पत्र की आवश्यकता होती है उसी तरह बिना पात्रता के दान पूजा सब निरर्थक है। मुनि श्री ने कहा कि महिलाओं द्वारा किया गया पुण्य जहां उनके ही खाते में जाता है वही उनके पतियों द्वारा किये गए पुण्य कार्य का आधा हिस्सा उनकी पत्नियों के खाते में जाता है। मुनिश्री ने 3 मार्च को विधान समापन अवसर पर निकलने वाली श्रीजी की विमान शोभा यात्रा को ऐतिहासिक रूप देने के लिए भी समाज जनों को मार्गदर्शन देते हुए युवा बालिका वर्ग को भरपूर सहभागिता का आव्हान किया।

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