
कलेक्टर बनने के लिए आपको 12वीं के बाद ग्रेजुएशन पूरी करनी होगी और फिर UPSC Civil Services Exam (CSE) (सिविल सेवा परीक्षा) पास करनी होगी, जो तीन चरणों (Preliminary, Main, Interview) में होती है, जिसके बाद IAS ट्रेनिंग होती है और फिर अनुभव के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर नियुक्त किया जाता है. इसके लिए 21-32 वर्ष की आयु (आरक्षित वर्गों को छूट) और किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री ज़रूरी है.
पात्रता और तैयारी
- शैक्षणिक योग्यता: किसी भी स्ट्रीम में स्नातक (Graduation) की डिग्री.
- आयु: न्यूनतम 21 वर्ष, अधिकतम 30/32 वर्ष (आरक्षण लागू).
- शुरुआत: 12वीं के बाद ग्रेजुएशन के दौरान ही UPSC की तैयारी शुरू कर दें, क्योंकि इसमें 2-3 साल लग सकते हैं.
- पढ़ाई: इतिहास, भूगोल, लोक प्रशासन, अर्थशास्त्र जैसे विषय फायदेमंद होते हैं, क्योंकि ये UPSC सिलेबस का हिस्सा हैं.
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चयन प्रक्रिया (UPSC CSE)
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): दो ऑब्जेक्टिव पेपर (GS-I & CSAT). यह सिर्फ क्वालीफाइंग होती है, इसके अंक मेरिट में नहीं जुड़ते.
- मुख्य परीक्षा (Mains): लिखित परीक्षा, जिसमें 9 पेपर होते हैं (2 क्वालीफाइंग, 7 मेरिट-आधारित). मुख्य परीक्षा के अंक फाइनल मेरिट तय करते हैं.
- साक्षात्कार (Interview): पर्सनालिटी टेस्ट (275 अंक). यह अंतिम चयन का तीसरा और आखिरी चरण है.
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प्रशिक्षण और नियुक्ति
- ट्रेनिंग: चयन के बाद मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग होती है.
- नियुक्ति: ट्रेनिंग के बाद IAS अधिकारी के रूप में पहली पोस्टिंग सहायक कलेक्टर (SDM) या एडीएम के रूप में होती है, और अनुभव व पदोन्नति के बाद जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) बनाया जाता है.


