
दमोह। महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के षष्ठ दीक्षांत समारोह में संस्कृत साधक एवं वेदान्त अध्येता श्री भगवान वेदांताचार्य रसिक को विद्यावारिधि (पीएचडी) की उपाधि ससम्मान प्रदान की गई। समारोह कालिदास संस्कृत अकादमी स्थित पंडित सूर्यनारायण व्यास संकुल सभागार में वैदिक परंपरा के अनुरूप गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुआ सम्मान समारोह की अध्यक्षता मंगूभाई पटेल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ मोहन यादव उपस्थित रहे। इस अवसर पर इंदर सिंह परमार सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे। संस्कृत और वैदिक परंपरा के संरक्षण का संकल्प उपाधि प्राप्त करने के बाद श्री भगवान ने अपनी सफलता का श्रेय गुरुजनों, माता-पिता और ईश्वर को दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि संस्कृत भाषा, भारतीय दर्शन और सनातन वैदिक परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन का नया संकल्प है। राष्ट्रपति से भी हो चुके हैं सम्मानित बाल्यकाल से ही मेधावी रहे श्री भगवान ने कम आयु में वैदिक मंत्रों और रुद्री का अध्ययन कर लिया था। आगे चलकर उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। वर्ष 2008 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा चार स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी इस उपलब्धि पर संत समाज, विद्वानों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।


