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E-Paperमध्य प्रदेश

वीरांगना रानी दुर्गावती ने इतिहास में पहली बार महिलाओं को सैन्य प्रशिक्षण देकर आत्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की- केंद्रीय राज्यमंत्री श्री उइके प्रदेश सरकार आदिवासी गौरव और संस्कृति के संरक्षण के लिए ‘रानी दुर्गावती लोक’ की स्थापना की दिशा में भी कार्य कर रही है- कैबिनेट मंत्री श्री शाह रानी दुर्गावती का जीवन त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणादायी मिसाल- राज्यमंत्री श्री लोधी रानी दुर्गावती द्वारा विकसित की गई योजनाओं और व्यवस्थाओं की दूरदर्शिता आज भी लोगों को प्रेरित करती है- राज्यमंत्री श्री पटेल वे केवल एक वीरांगना ही नहीं, बल्कि साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की अमर प्रतीक हैं- पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष डॉ. कुसमरिया सिंग्रामपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर गरिमामय कार्यक्रम संपन्न

            वीरांगना रानी दुर्गावती का जीवन और बलिदान आज भी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। इतिहास में पहली बार महिलाओं के संगठन और सैन्य भागीदारी को प्रभावी स्वरूप देने का कार्य महारानी रानी दुर्गावती ने किया था। उन्होंने महिलाओं को युद्ध कौशल का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ आत्मरक्षा के लिए भी सक्षम बनाया। जिस प्रकार रानी दुर्गावती ने अपने शासनकाल में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी थी, उसी भावना को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आगे बढाने का काम किया है, इस आशय के विचार केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार दुर्गादास उइके ने रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर सिंग्रामपुर में आयोजित गरिमापूर्ण कार्यक्रम में व्यक्त किये। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय ने वीरांगना रानी दुर्गावती के आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया।

             केंद्रीय राज्यमंत्री श्री उइके ने कहा देश की आदिवासी बेटी द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाना समाज के करोड़ों आदिवासियों के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। उन्होने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए संचालित ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, उज्ज्वला योजना, स्व-सहायता समूहों का सशक्तिकरण, महिलाओं को आरक्षण, ‘लाड़ली बहना’, ‘लाड़ली लक्ष्मी’ तथा ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओ के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं।

            उन्होने कहा भारत की सांस्कृतिक विविधता में मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना सदैव सर्वोपरि रही है। हिंदी में “भारत माता की जय”, संस्कृत में “वंदे मातरम्” तथा गोंडी भाषा में “धरती दायिना सेवा-सेवा” का भाव एक ही है, जो मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता और सम्मान को व्यक्त करता है।

            प्रदेश के आदिम जाति कल्याण एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत कैबिनेट मंत्री कॅुवर विजय शाह ने कहा आदिवासी प्रतिभाशाली युवाओं को उच्च प्रशासनिक एवं न्यायिक सेवाओं में अवसर दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। उन्होने कई प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं आर्थिक अभाव, बेहतर कोचिंग और रहने-खाने की सुविधाओं के अभाव में अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जबलपुर में विशेष आवासीय प्रशिक्षण केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होने कहा 15 अगस्त से जबलपुर में आईएएस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग सेंटर शुरू किया जाएगा, जहां चयनित विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, भोजन और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

            कैबिनेट मंत्री श्री शाह ने कहा आदिवासी युवाओं को न्यायिक एवं विधि क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए क्लैट (CLAT) परीक्षा की तैयारी हेतु भी विशेष व्यवस्था की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत चयनित 50 छात्राओं और 50 छात्रों को दो वर्ष तक आवासीय सुविधा के साथ प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे वकील, न्यायाधीश एवं विधि विशेषज्ञ बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें। प्रत्येक जिले से योग्य एवं इच्छुक स्नातक युवक-युवतियों का चयन किया जाएगा।

             उन्होने कहा प्रदेश सरकार आदिवासी गौरव और संस्कृति के संरक्षण के लिए ‘रानी दुर्गावती लोक’ की स्थापना की दिशा में भी कार्य कर रही है। यह परियोजना वीरांगना रानी दुर्गावती के शौर्य, त्याग और आदिवासी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

            कैबिनेट मंत्री श्री विजय शाह ने कहा जिले के ग्राम चौरई में बड़ा देव मंदिर का निर्माण किया गया है, वहां पर प्रतिवर्ष 5 दिन का मेला लगाने के लिए 30 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की और कहा हर साल यह राशि मेले के लिए दी जाएगी उन्होंने मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार जताते हुए कहा अगली वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस मेले में अवश्य पधारेंगे। उन्होने प्रियांशी भलावी की कलामण्डली के सदस्यो को पोशाक के लिए 5-5 हजार रूपये और प्रियांशी भलावी को 21 हजार रूपये देने साथ ही आदिवासी संग्रहालय की भी घोषणा की गई।

            प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि रानी दुर्गावती ने उस दौर में मुगल आक्रांताओं का साहसपूर्वक सामना किया, जब वे देश में अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहे थे। उन्होंने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा अपने पराक्रम से इतिहास में अमिट पहचान बनाई। उन्होने कहा रानी दुर्गावती का जीवन त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणादायी मिसाल है। उन्होंने रणभूमि में अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया और अंतिम क्षण तक शत्रुओं के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। उनकी वीरता की गाथा आज भी जन-जन को प्रेरित करती है।

            राज्यमंत्री श्री लोधी ने कहा शहीदों और वीरांगनाओं का बलिदान सदैव स्मरणीय रहता है। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होने कहा सिंगौरगढ़ क्षेत्र, जो रानी दुर्गावती की ऐतिहासिक राजधानी रहा है, उससे जुड़े होने का गौरव हम सभी को प्राप्त है। ऐसे महान व्यक्तित्व की स्मृतियों को संजोना और नई पीढ़ी तक उनके शौर्य की गाथा पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

            प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 24 जून 2024 को मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक सिंगौरगढ़ क्षेत्र में आयोजित की गई थी। मंत्रिमंडल के सदस्य ऐतिहासिक सिंगौरगढ़ किले का भी अवलोकन करने पहुंचे थे। उन्होने कहा अनेक लोगों ने पहली बार इस ऐतिहासिक किले को देखा और इसकी अद्वितीय संरचना तथा स्थापत्य कला की सराहना की। आगंतुकों ने कहा कि ऐसा किला उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती द्वारा विकसित की गई योजनाओं और व्यवस्थाओं की दूरदर्शिता आज भी लोगों को प्रेरित करती है।

            राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गई थीं तथा बड़े स्तर पर मेले का आयोजन हुआ था। उन्होने नागरिकों से आह्वान किया कि वे रानी दुर्गावती के आदर्शों को अपनाते हुए प्रदेश और देश के विकास में अपना योगदान दें। उन्होने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने, समाज को नशामुक्त बनाने तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।            मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अध्यक्ष  डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा वे केवल एक वीरांगना ही नहीं, बल्कि साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की अमर प्रतीक हैं। रानी दुर्गावती के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा यह वीर भूमि सदैव पराक्रम और स्वाभिमान की गाथाओं की साक्षी रही है। रानी दुर्गावती ने अपने शौर्य, नेतृत्व और बलिदान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से आने वाली पीढ़ियां निरंतर प्रेरणा प्राप्त करती रहेंगी।

            उन्होने कहा महान विभूतियों का जीवन समाज के लिए मार्गदर्शक होता है। उनके आदर्शों का अनुसरण कर हम राष्ट्र और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि रानी दुर्गावती के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम को आत्मसात कर प्रदेश एवं देश की प्रगति में सहभागी बनें।

अक्ष भारत

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