महाराष्ट्र का सौंदला बना देश का पहला “जाति-मुक्त गांव”
गांव को “मॉडल विलेज” बनाने के लिए विशेष सहायता देने पर भी विचार किया जा रहा है।

महाराष्ट्र का सौंदला बना देश का पहला “जाति-मुक्त गांव”
सौंदला गांव ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए खुद को देश का पहला “जाति-मुक्त गांव” घोषित कर दिया है। यह फैसला 5 फरवरी 2026 को ग्राम सभा में सर्वसम्मति से लिया गया।
क्या है फैसला?
गांव के लोगों ने मिलकर यह तय किया कि:
- अब कोई भी व्यक्ति जाति सूचक सरनेम का इस्तेमाल नहीं करेगा
- गांव में जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा
- “मानवता ही एकमात्र धर्म” माना जाएगा
ग्राम सभा में क्या हुआ?
इस विशेष बैठक की अध्यक्षता सरपंच शरद बाबू ने की।
गांव के सभी वर्गों—बहुजन समाज और मुस्लिम परिवारों सहित—ने मिलकर इस प्रस्ताव को पास किया।
गांव में क्या-क्या बदलाव होंगे?
- नाम के आगे जाति बताने वाले उपनाम हटाए जाएंगे
- स्कूल या दस्तावेज़ों में जाति की जगह सिर्फ पहचान दी जाएगी
- त्योहारों में सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करेंगे
- मंदिर, कुएं और अन्य संसाधनों पर सभी का बराबर अधिकार होगा
- जातिगत भेदभाव करने पर पंचायत कार्रवाई करेगी
यह विचार कैसे आया?
गांव के पढ़े-लिखे युवाओं ने यह पहल शुरू की।
उन्होंने देखा कि चुनाव और त्योहारों में जाति के कारण झगड़े होते हैं, जिससे विकास रुकता है। धीरे-धीरे उन्होंने बुजुर्गों को समझाया और पूरा गांव इस सोच से जुड़ गया।
पहले भी कर चुके हैं सुधार
इस गांव ने पहले भी कई सामाजिक फैसले लिए हैं:
- विधवाओं के साथ भेदभाव खत्म करना
- गाली-गलौज पर ₹500 जुर्माना
- CCTV निगरानी व्यवस्था
- विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा
चुनौतियां भी हैं
सरकारी कामों में अभी भी जाति प्रमाण पत्र और आरक्षण की जरूरत पड़ती है।
लेकिन गांव वालों का मानना है कि सोच से जाति खत्म करना ज्यादा जरूरी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन ने इस पहल की तारीफ की है और इसे सच्चा लोकतंत्र बताया है।
गांव को “मॉडल विलेज” बनाने के लिए विशेष सहायता देने पर भी विचार किया जा रहा है।



