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वैज्ञानिक एवं तार्किक आधार पर कानून बनाने की आवश्यकता- सदस्य श्री नायर समान नागरिक संहिता पर जन-परामर्श बैठक आयोजित उच्च स्तरीय समिति ने नागरिकों से मांगे सुझाव नागरिकों से लिखित एवं ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित

 मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं कानूनविद् श्री अनूप नायर की अध्यक्षता में जन-परामर्श बैठक का आयोजन पी.एम श्री कॉलेज, दमोह के सभागार में अपराह्न 3:30 बजे से किया गया। बैठक में विभिन्न वर्गों के प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न समाजो के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

            बैठक को संबोधित करते हुए समिति सदस्य श्री अनूप नायर ने कहा कि वर्तमान में भारत में विवाह, विवाह विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं दत्तक ग्रहण जैसे विषयों पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग कानून लागू हैं। उन्होंने कहा संविधान निर्माण के समय कंस्टीट्यूएंट असेंबली में समान नागरिक संहिता का मुद्दा प्रमुख रूप से उठा था। डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं के.एम. मुंशी इसके पक्ष में थे, जबकि कुछ सदस्य इसके पक्ष में नही थे। इसी कारण इसे तत्काल लागू न करते हुए संविधान के अनुच्छेद 44 में शामिल किया गया।

            सदस्य श्री नायर ने कहा कि वर्तमान धार्मिक आधारित कानूनों में सबसे अधिक प्रभावित महिलाएं और बच्चे होते हैं। उन्होंने कहा समय-समय पर कई कानूनी सुधार हुए हैं।

            उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयास करने की सलाह दी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने जन-परामर्श प्रक्रिया शुरू की है, ताकि नागरिकों से सुझाव लेकर विवाह, विवाह विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण एवं लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर समान अधिकार आधारित कानून बनाने की संभावना पर विचार किया जा सके।

            समिति सदस्य ने उपस्थित नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने सुझाव खुलकर रखें। उन्होंने कहा कि इच्छुक नागरिक मौखिक, लिखित अथवा वेबसाइट ucc.mp.gov.in के माध्यम से भी अपने सुझाव दे सकते हैं। प्राप्त सुझावों पर समिति विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने विषय पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

            बैठक में वक्ताओं ने समान नागरिक संहिता के सामाजिक, विधिक एवं संवैधानिक पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उपस्थित नागरिकों ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार तथा पारिवारिक कानूनों से संबंधित विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियो एवं गणमान्य नागरिकों मीडियाजनो, विभिन्न समाजो के प्रतिनिधियो, कानूनविदों (अभिभाषक), अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संगठनो आदि ने सहभागिता की।

            इस अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसुरिया जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, उपाध्यक्ष मंजू धर्मेंद्र कटारे, जनपद अध्यक्ष प्रीति कमल ठाकुर, भाव सिंह लोधी मासाब, बार काउंसिल के सदस्य, बाल संरक्षण समिति के सदस्य, मातृशक्ति, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव, विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी, कर्मचारी, अधिवक्तागण, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा मीडिया प्रतिनिधि आदि उपस्थित रहे।

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