चेक अनादरण मामले में दोषसिद्धि 6 माह का सश्रम कारावास, 5.80 लाख प्रतिकर का आदेश
चेक अनादरण मामले में दोषसिद्धि 6 माह का सश्रम कारावास, 5.80 लाख प्रतिकर का आदेश
दमोह। चेक अनादरण के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में न्यायालय श्रीमान उत्कर्ष दिवाकर, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दमोह ने परिवादी समीर चिले पिता डॉ. रघुनन्दन चिले निवासी पलंदी चौराहा दमोह द्वारा प्रस्तुत परिवाद को स्वीकार करते हुए अभियुक्त गजराजसींग लोधी पिता स्व. लल्लूसींग लोधी, निवासी ग्राम बड़गुवां, पोस्ट लखनी, तहसील जबेरा, जिला दमोहको धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अपराध में दोषी ठहराया है। प्रकरण में परिवादी समीर चिले की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार चतुर्वेदी ने परिवाद प्रस्तुत कर न्यायालय के समक्ष साक्ष्य एवं प्रभावी विधिक तर्क रखे। दोनों पक्षों की सुनवाई उपरांत न्यायालय ने परिवादी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अधिवक्ता प्रवीण कुमार चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत तर्कों से सहमत होते हुए अभियुक्त को दोषसिद्ध किया। माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय दिनांक 15.09.2026 द्वारा अभियुक्त गजराजसिंह लोधी को छः माह के सश्रम कारावास से दंडित करते हुए परिवादी को 5,80,000 (पांच लाख अस्सी हजार रुपये) प्रतिकर अदा करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह भी आदेशित किया है कि प्रतिकर राशि का भुगतान न किए जाने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। उक्त निर्णय से चेक के माध्यम से किए जाने वाले आर्थिक एवं व्यावसायिक लेन-देन में विश्वास एवं विधिक दायित्व के महत्व को पुनः बल मिला है।


