जो गरीबी में संतोषी रखता है उसे भगवान बिना मांगे ही सब देते है
जो गरीबी में संतोषी रखता है उसे भगवान बिना मांगे ही सब देते है

सुदामा चरित्र निस्वार्थ मित्रता, अटूट भक्ति और त्याग का संदेश देता है – संजय शास्त्रीदमोह । श्री सिद्ध धाम हनुमान मंदिर ख़ेजरा धाम में संगीतमय श्रीमदभागवत कथा में आज अंतिम दिवस कथा व्यास संजय शास्त्री महाराज जी द्वारा सुदामा चरित्र भगवान कृष्ण और उनके निर्धन सखा सुदामा की निस्वार्थ मित्रता, अटूट भक्ति और त्याग की पावन कथा श्रवण कराई गई । गरीबी में भी संतोषी रखना चाहिए। जो संतोषी रखता है उसे बिना मांगे ही सब कुछ मिल जाता है। जैसा सुदामा जी के साथ हुआ। सुदामा की पत्नी सुशीला के आग्रह पर द्वारकाधीश कृष्ण से मिलने जाते हैं, जहाँ कृष्ण उन्हें गले लगाकर, आंसुओं से चरण धोकर आदर देते हैं और बिन मांगे ही सुदामा की गरीबी दूर कर देते हैं।
सुदामा चरित्र की मुख्य बातें:
बचपन की मित्रता: सुदामा और कृष्ण सांदीपनि मुनि के आश्रम में सहपाठी थे।
अत्यधिक निर्धनता: सुदामा अत्यंत गरीब थे और भिक्षा मांगकर परिवार पालते थे, फिर भी संतोषी थे।
द्वारका यात्रा: पत्नी सुशीला के कहने पर वे मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका गए, भेंट स्वरूप केवल कुछ मुट्ठी चावल (चिउड़े) लेकर।
कृष्ण-सुदामा मिलन: कृष्ण ने सुदामा को सिंहासन पर बैठाया, अश्रुओं से चरण धोए और दोनों बचपन की यादों में खो गए।
बिना मांगे सब कुछ: सुदामा ने संकोचवश चावल नहीं दिए, लेकिन कृष्ण ने भांपकर खा लिए। सुदामा को कुछ न मांगकर भी, घर लौटने पर कृष्ण की कृपा से दिव्य महल मिला।
पंडित संजय शास्त्री जी ने कहा कि यह कथा सिखाती है कि भगवान केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं, और सच्चा मित्र हमेशा विपत्ति में सहायक होता है। कथा के उपरान्त हवन पूजन पूर्णाहुति के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कथा आयोजक जीवनलाल पटेल ने सभी से अनुरोध किया है कि बुधवार को आयोजित भंडारे में आप सभी प्रसाद ग्रहण करे।




