
दमोह। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी ओवर ब्रिज के आगे हटा रोड़ दमोह में स्थित संत श्री आशारामजी आश्रम के आत्मिक शांति प्रदान करने वाले सुरम्य, शांत, मनमोहक, आध्यात्मिक, वातावरण में वैदिक परंपराओं व प्राकृतिक रंगों पलाश ( टेसू ), गेंदा, गुलाब आदि के फूलों के रंगों गंगाजल, सुगन्धित इत्र आदि के मिश्रण से निर्मित रंगों की बौछारों से सम्पन्न हुआ वैदिक होली रंगपंचमी महोत्सव जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे, बच्चियां, महिलाए, पुरुष आदि की उपस्थिति देखी गयी। आयोजन समिति के अनुसार संत श्री आशारामजी बापू की पावन प्रेरणा से विगत 40 वर्षों से देश-विदेश में स्थित लगभग 450 आश्रमों में प्राकृतिक रंगों से बड़ी ही भव्यता व सात्विकता से मनाया जाता है वैदिक होली महोत्सव इसी श्रृंखला में दमोह में स्थित आश्रम में भी आज रंगपंचमी होली महोत्सव का कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास, पवित्रता, प्राकृतिक रंगों की बौछारों भगवन्नाम की धुनों व भंडारा भोजन प्रसादी आदि के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ गुरु वंदना, भगवन्नाम सुमिरन,सत्संग से हुआ उसके पश्चात श्री राधा-कृष्ण का रूप धारण किए बालिकाओं ने प्राकृतिक रंगों से निर्मित फुहारों के माध्यम से सैकड़ों भक्तों पर रंगों की बौछार कर सभी भक्तों को रंग दिया सभी श्रद्धालु आज अपने शरीर को पलाश के स्वास्थ्य वर्धक रंग व गुरु के ज्ञान एवं मन को भगवन्नाम की भक्ति के रंग से रंग रहे थे। आयोजन समिति ने सभी सेवाधारियों भाई बहनों को आभार व साधुवाद दिया एवं सभी पधारे हुए श्रद्धालुओं को इस पावन पर्व की खूब-खूब शुभकामनाएं एवं बधाईयां दी और सभी शहर वासियों को स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली केमिकल युक्त रंगो से बचकर पवित्र प्राकृतिक स्वास्थ्य वर्धक रंगो से वैदिक होली खेलने का आव्हान किया।



