नन्हें मंदिर जी मे भगवान सुपारस नाथ जी का मोक्ष कल्याण क मनाया गया ज्ञान चरित्र के बिना अधूरा… मुनि पदम् सागर जी
नन्हें मंदिर जी मे भगवान सुपारस नाथ जी का मोक्ष कल्याण क मनाया गया ज्ञान चरित्र के बिना अधूरा... मुनि पदम् सागर जी

दमोह। जैन धर्म के साथ में तीर्थंकर भगवान सुपारस नाथ जी का निर्वाण कल्याणक महोत्सव सभी जैन मंदिरों में भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर जी में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समाज सागर जी के शिष्य मुनि श्री पदम सागर जी महाराज के ससंघ के सानिध्य में मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाते हुए निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। रविवार को प्रातः बेला में श्री जी के अभिषेक शांति धारा के साथ भगवान सुपारस नाथ जी की भी शांति धारा बोलिया लगाकर भक्ति भाव के साथ की गई। तत्पश्चात मुनि श्री के सानिध्य में निर्वाण कांड के साथ मोक्ष कल्याणक मनाते हुए निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य वंदना संजय सराफ, रूही नानू सराफ परिवार को प्राप्त हुआ।
ज्ञान चरित्र के बिना अधूरा… मुनि पदम् सागर जी इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ने मंगल उद्बोधन में कहा जिसके पास ज्ञान है किंतु चरित्र नहीं है तो ज्ञान अधूरा ही माना जाएगा श्री ज्ञान सागर जी महाराज ग्रस्त अवस्था में प्रकाड विद्वान थे पंडित भुरामल के नाम से प्रसिद्ध थे अपार ज्ञान होने के बाद भी उन्होंने चरित्र को अंगीकार किया और मुनि दीक्षा ली और आचार्य ज्ञान सागर बने आचार्य बनने के बाद उन्होंने अनेक शास्त्र लिखें आप संस्कृत पढ़ रहे हैं किंतु पढ़ने वाला विद्वान यदि शुद्ध नहीं पढ़ रहा है तो आपके उच्चारण में सदैव वही शब्द आएंगे एक बार संस्कृत का उच्चारण गलत होने से वही उच्चारण बार-बार आप का निकलता है. इसलिए जिनको अच्छा ज्ञान है उन्ही विद्वॉन से संस्कृत पढ़ना चाहिए। मुनि श्री के सानिध्य में आगामी अष्टानिका पर्व पर श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान आयोजन की रूपरेखा तय की जा रही है। वही प्रतिदिन प्रात 9 बजे से मुनि श्री के मंगल प्रवचन होते हैं। 10 बजे मुनिश्री आहार चर्या को निकलते हैं। आज मुनि श्री का पड़गाहन करके अपने चौके में ले जाकर आहार कराने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी अरविंद इटोरिया परिवार को प्राप्त हुआ।



