अरिहंत चक्र विधान के तीसरे दिन समवशरण में सप्त भूमियों के अर्घ्य समर्पित किए गए
अरिहंत चक्र विधान के तीसरे दिन समवशरण में सप्त भूमियों के अर्घ्य समर्पित किए गए

दमोह। श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हें मंदिर एवं सकल जैन समाज के द्वारा चौबीस समोशरण श्री 1008 अर्हन्त चक्र महामंडल विधान का आयोजन आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समय सागर जी के मंगल आशीर्वाद से मुनिश्री पदम सागर जी के ससंघ सानिध्य में भक्ति मय उल्लास के साथ चल रहा है । नगर की उमा मिस्त्री की तलैया में अष्टानिका महापर्व पर 24 फरवरी से 3 मार्च तक आयोजित 24 समोशरण महामंडल विधान के तीसरे दिन मुनि श्री पदम सागर जी एवं छुलल्क श्री तात्पर्य सागर जी के सानिध्य में गुरुवार को तीसरे दिन विधान पूजन सहित विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। प्रातः बेला में श्री जी के अभिषेक उपरांत मुख्य शांति धारा करने का सौभाग्य पदम चंद मुकेश राजकुमार रानू खजरी परिवार को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात ब्रह्मचारी दीपक भैया अभिषेक शास्त्री एवं प्रतिष्ठा चार्य पं सुरेश शास्त्री के निर्देशन में विधान पूजन प्रारंभ हुआ। आज तीसरे दिन मुख्य समवशरण के साथ 24 समोशरण में सप्त भूमियों के अर्घ्य समर्पित किए गए। 24 तीर्थंकरों के अर्घ्यं बारी बारी से चैत्य प्रसाद भूमि, मंडप भूमि, लता भूमि, स्वातिका भूमि, उपवन भूमि, कल्पवृक्ष भूमि एवं भवन भूमि पर भक्तिमय उल्लास के साथ समर्पित किए गए। इस अवसर पर ध्वजा भूमि में स्वर्ण ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य मनोज मीनू जैन विजय आयरन परिवार को प्राप्त हुआ। वही अन्य समोशरण में रजत ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य विभिन्न श्रावक श्रेष्ठि परिवार जनों को प्राप्त हुआ। मुनि श्री के प्राद प्रच्छालन का सौभाग्य विधान संयोजक महेश दिगंबर को तथा शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य आज के श्रावक श्रेष्ठि राजकुमार जैन खजरी परिवार को प्राप्त हुआ। रात्रि में महा आरती करने का सौभाग्य जैन पंचायत के महामंत्री तथा विधान के कुबेर इंद्र पदमचंद जैन खाली परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मुख्य समोशरण में सौधर्म इंद्र एकांश अस्मिता जैन अभाना वाला परिवार, भरत चक्रवर्ती रमेश कुमार भेड़ा वाला परिवार, कुबेर महाराज पदमचंद जैन खली वाला परिवार, महायज्ञ नायक प्रवीण जैन महावीर ट्रांसपोर्ट परिवार को पूजन विधान का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुख्य समोशरण के चारों तरफ बैठक मुख्य ध्वजारोहण कर्ता मनोज जैन मीनू विजय आयरन परिवार, सहायक ध्वजारोहण कर्ता संतोष साधना गांगरा आर्शीवाद परिवार, जिनेंद्र जैन मड़ला वाला परिवार, महेश दिगंबर एवं अमित त्यागी मातेश्वरी मीना जैन, पांडाल उदघाटनकर्ता डा. सरोज जैन परिवार को पूजन विधान का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुख्य गंधकुटी समोशरण में श्री संतोष सिंघई परिवार तथा श्री चंदकुमार अभिषेक जैन खजरी परिवार को पूजन विधान का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहीं 22 लघु समोशरण के समक्ष 22 सौधर्म इंद्र परिवारों को तथा मुख्य पांडाल में इंद्र इंदाणियों को पूजन विधान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
पंच परमेष्ठी में साधु का पद सर्वश्रेष्ठ है- मुनि श्री पदम सागर जी
श्री अरहंत चक्र महामंडल विधान अवसर पर तीसरे दिन गुरुवार को धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री पदम सागर जी ने 24 समवशरण की महिमा बताते हुए कहा कि द्रव्य काल क्षेत्र के अनुसार धर्म कार्य करने का कई गुना फल प्राप्त होता है इस दौरान किया गया दान का पुण्य भी जन्म जन्मांतर तक साफ जाता है। साधु परमेष्ठी की महिमा बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि पंच परमेष्ठी में अरिहंत सिध्द आचार्य उपाध्यय बनने के लिए सबसे पहले मुनि अर्थात साधु बनना आवश्यक होता है। साधु परमेष्ठी को इसलिए भी श्रेष्ठ कहा गया है क्योंकि अंतिम समय में समाधि मरण के पूर्व आचार्य उपाध्याय अपने पद का त्याग जर देते है। इसी तरह अरिहंत तथा सिद्ध बनने के लिए भी अभी पदों का त्याग करना पड़ता है। मुनि श्री ने विशेष पर्व अवसरों पर किए गए धर्म कार्यों एवं दान की महिमा बताते हुए कहा कि अष्टानिका जैसे महापर्व में हम नंदीश्वर दीप में जाकर भले ही पूजन विधान नहीं कर पा रहे हो लेकिन मध्य क्षेत्र में कृत्रिम समोसारण की रचना करके पूजन विधान करके हम कई गुना पुण्य संचित अर्जित कर लेते हैं। मुनिश्री ने कहा कि यह परम सौभाग्य का विषय है कि आचार्य भगवान के आशीर्वाद से आप सभी को यहां पर 25 समवशरण की रचना करके श्री अरिहंत चक्र महामंडल विधान करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है जिसमें नगर के 24 जिनालय्यों से आए 34 जिन बिंवो की एक साथ पूजा अर्चन करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इस सौभाग्य को महासौभाग्य में बदलने के लिए महाबोलियो के जरिए अपनी चंचल लक्ष्मी का उपयोग करना चाहिए। आपके साथ आपकी धन संपदा तो नहीं जाएगी लेकिन आज किया गया दान पुण्य भव भव तक साथ निभाएगा।



