01 मार्च से लागू होगी ई-विकास प्रणाली, खाद वितरण में आएगी पारदर्शिता- कलेक्टर श्री कोचर सभी एजेंसियां एक प्लेटफॉर्म पर, किसानों को नहीं लगानी पड़ेगी लाइन फार्मर आईडी अनिवार्य, टोकन सिस्टम से मिलेगा खाद समस्या होने पर जनसुनवाई व हेल्पलाइन से मिलेगा समाधान
मध्यप्रदेश शासन द्वारा विकसित ई-विकास प्रणाली को जिले में 01 मार्च से लागू किया जा रहा है। इस प्रणाली का उद्देश्य किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार खाद का पारदर्शी एवं समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि किसानों को लंबी लाइनों में न लगना पड़े और उन्हें बिना परेशानी खाद उपलब्ध हो सके।
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि इस सिस्टम की विशेषता यह है कि खाद वितरण से जुड़ी सभी एजेंसियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत कर दिया गया है। इसमें को-ऑपरेटिव सोसायटी, एमपी एग्रो, मार्केटिंग सोसायटी, डबल लॉक केंद्र तथा निजी विक्रेता शामिल हैं। इससे वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद किसान को उसकी भूमि और खेती के आधार पर खाद की पात्रता की जानकारी मिल जाएगी। इसके बाद टोकन जेनरेट होगा और उसी के आधार पर किसान को खाद प्रदान किया जाएगा। इससे अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति समाप्त होगी।
फार्मर आईडी बनवाना जरूरी
कलेक्टर श्री कोचर ने बताया कि किसानों के लिए फार्मर आईडी बनवाना अनिवार्य है। फार्मर आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड, समग्र आईडी, आधार से लिंक मोबाइल नंबर OTP हेतु तथा जमीन के खसरा नंबर की जानकारी आवश्यक है। यदि यह जानकारी उपलब्ध है तो संबंधित पटवारी द्वारा फार्मर आईडी तैयार की जाएगी। यदि किसी किसान को फार्मर आईडी बनवाने में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वह जनसुनवाई में उपस्थित होकर अथवा दमोह हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकता है। प्रशासन द्वारा तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, वे ‘अन्य किसान’ श्रेणी में पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं।
उन्होने बताया कि 01 मार्च से यह प्रणाली लागू की जाएगी और धीरे-धीरे पूरी गति पकड़ेगी। प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक किसान को उसकी पात्रता के अनुसार खाद बिना किसी परेशानी के उपलब्ध हो सके।


