विधि की दृष्टि में सभी एक समान – न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष दिवाकर ओजस्वनी उच्च. माध्य. विद्यालय दमोह में जागरूकता कार्यक्रम संपन्न
विधि की दृष्टि में सभी एक समान

दमोह: 21 जनवरी 2026
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के तत्वाधान में एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रिंसिपल जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष सुभाष सोलंकी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह के मार्गदर्शन में ओजस्वनी उच्च. माध्य. विद्यालय दमोह में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। उक्त शिविर में न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष दिवाकर, जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया, प्राचार्य श्रीराम बिदौल्या, शिक्षक मुन्नालाल कुर्मी के साथ अन्य शिक्षकगण सहित छात्र-छात्रायें उपस्थित रहीं।
उक्त आयोजित शिविर में न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष दिवाकर ने छात्र-छात्राओं को संविधान में वर्णित मूल अधिकार एवं कर्त्तव्यों की विस्तृत जानकारी देते हुये विधि के समक्ष समता एवं विधि का समान संरक्षण, लिंग भेद, जातिगत भेद, शिक्षा का अधिकार एवं अन्य स्वतंत्रता के संबंध में बताया गया कि सभी वर्ग के व्यक्ति विधि के समक्ष समान होते है जैसे एक निर्धन व्यक्ति एवं एक सम्पन्न व्यक्ति दोनों के द्वारा कोई अपराध किया जाता है तो विधि में दोनों वर्गो के व्यक्तियों के प्रकरण में न्यायालय द्वारा एक समान दण्ड से दंडित किया जाता है। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 51 ए में नागरिकों के कर्त्तव्यों का उल्लेख किया गया है जिसका पालन हर नागरिक को करना चाहिये, साथ ही पाक्सो अधिनियम तथा इंटरनेट के सदुपयोग संबंधी जानकारी दी।
जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया द्वारा उपस्थित छात्र-छात्राओं को बाल-विवाह मुक्त भारत के संबंध में जानकारी देते हुये कहा कि बाल-विवाह, बच्चो को उनके अधिकारों से वंचित करता है, बाल-विवाह से बच्चों का सर्वागीण विकास भी रूक जाता है तथा यह कानून के द्वारा दंडनीय अपराध भी है। बाल-विवाह मुक्त भारत का उद्देष्य बाल-विवाह को रोकना और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है, बाल-विवाह की रोकथाम हेतु चाईल्ड हेल्पलाईन, पुलिस को सूचना दी जा सकती है, जिसमें सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाता है। आपने बाल-विवाह अंतर्गत गठित आशा यूनिट, नशे के दुष्परिणाम, किशोर न्याय बोर्ड, मोटरयान अधिनियम इत्यादि विषय पर छात्र-छात्राओं को जानकारी दी।




