जंगल की पाठशाला में गूँजा संकल्प— “मैं भी बाघ
जंगल की पाठशाला में गूँजा संकल्प— "मैं भी बाघ
जंगल की पाठशाला में गूँजा संकल्प— “मैं भी बाघ”
दमोह में ‘अनुभूति’ कार्यक्रम के जरिए बच्चों ने सीखी प्रकृति की वर्णमाला
“वन मंडल अधिकारी ने बच्चों को ‘पर्यावरण प्रहरी’ बनने का संकल्प दिलाते हुए प्रकृति संरक्षण को जीवन का मूल मंत्र बताया”
दमोह: 22 जनवरी 2026
मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग एवं इको पर्यटन विकास बोर्ड के तत्वावधान में आज दमोह वन मंडल के अंतर्गत बीट हथनी (आर.एफ. 109) में भव्य ‘अनुभूति कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। वन मंडल अधिकारी श्री ईश्वर जरांडे के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में स्कूली छात्र-छात्राओं ने किताबी दुनिया से निकलकर प्रकृति की गोद में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
पर्यावरण के साथ करियर की राह: वन मंडल अधिकारी ने दिए सफलता के मंत्र
कार्यक्रम के दौरान वन मंडल अधिकारी श्री ईश्वर जरांडे ने छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने न केवल पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के महत्व को समझाया, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर करियर मार्गदर्शन भी दिया। श्री जरांडे ने छात्रों को बताया कि वे कैसे कड़ी मेहनत और अनुशासन के माध्यम से वन सेवा (Forest Services) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकते हैं। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा, “प्रकृति की सेवा के साथ-साथ देश की सेवा करना गर्व की बात है। यदि आप लक्ष्य निर्धारित कर चलें, तो वन विभाग जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपना भविष्य संवार सकते हैं।”
जंगल की पगडंडियों पर रोमांचक सफर
कार्यक्रम की शुरुआत वन भ्रमण के साथ हुई, जहाँ शासकीय उ.मा. विद्यालय हृदयपुर और सरदार पटेल विद्यालय के 130 छात्र-छात्राओं को रेंजर श्री विक्रम चौधरी और उनकी टीम ने दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों की पहचान कराई। बच्चों को वन्यजीवों के पदचिह्न (पगमार्क) और विष्ठा दिखाकर यह समझाया गया कि कैसे जंगल के राजा ‘बाघ’ की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
“हम हैं धरती के दूत” – मास्टर ट्रेनर ने जगाया उत्साह
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मास्टर ट्रेनर श्री बी.एल. रोहित ने “मैं भी बाघ” की थीम पर जानकारी देते हुए कहा कि जिस तरह बाघ जंगल की रक्षा करता है, उसी तरह हर बच्चे को जागरूक रहकर वनों की रक्षा करनी होगी।


