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भारतीय झंडा संहिता 2002भारत सरकार

भारत सरकार

भारतीय झंडा संहिता
भारत का राष्ट्रीय झंडा, भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का
प्रतिरूप है। यह हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। पिछले पांच दशकों में अनेक
लोगों और सशस्त्र सैनिकों ने इस तिरंगे को पूर्ण गौरव के साथ फहराते रहने के लिये
सहजता पूर्वक अपने जीवन का बलिदान दिया है।
राष्ट्रीय झंडे के रंगों और उसके मध्य में चक्र के महत्व का यथेष्ट वर्णन
डा राधाकृष्णन द्वारा संविधान सभा में किया गया था। इस संविधान सभा ने
सर्वसम्मति से राष्ट्रीय झंडे को स्वीकार किया था। डा० एस राधाकृष्णन ने स्पष्ट
किया कि “भगवा या केसरिया रंग त्याग या निःस्वार्थ भावना का प्रतीक है। हमारे
नेतागणों को भौतिक सुखों से विरक्त तथा अपने कार्य के प्रति समर्पित होना
चाहिए। झंडे के मध्य में सफेद रंग हमें सच्चाई के पथ पर चलने और अच्छे आचरण
की प्रेरणा देता है। हरा रंग मिट्टी और वनस्पतियों के साथ हमारे संबंधों को उजागर
करता है जिन पर सभी प्राणियों का जीवन आश्रित है। सफेद रंग के मध्य में अशोक
चक्र धर्म के राज का प्रतीक है। इस झंडे तले शासन करने वाले लोगों को सत्य,
धर्म या नैतिकता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। पुनश्च, चक्र प्रगति का
प्रतीक है, जड़ता प्राणहीनता का प्रतीक है। चलना ही जिंदगी है। भारत को परिवर्तन
की अनदेखी नहीं करनी है, अपितु आगे ही आगे बढ़ना है। चक्र शान्तिपूर्ण परिवर्तन
की गतिशीलता का प्रतीक है।”
सब के मन में राष्ट्रीय झंडे के लिए प्रेम,आदर और निष्ठा है। लेकिन प्रायः देखने
में आया है कि राष्ट्रीय झंडे को फहराने के लिए जो नियम, रिवाज़ और औपचारिकताएं
हैं उसकी जानकारी न तो आम जनता को है और न ही सरकारी संगठनों और
एजेंसियों को । सरकार द्वारा समय-समय पर जारी असांविधिक निर्देशों, संप्रतीक
और नाम (अनुचित प्रयोग का निवारण) अधिनियम, 1950 (1950 का सं० 12)
तथा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (1971 का 69) के उपबंधों
के तहत राष्ट्रीय झंडे का प्रदर्शन नियंत्रित होता है। सभी के मार्गदर्शन और हित के
लिए भारतीय झंडा संहिता, 2002 में सभी नियमों, रिवाज़ों, औपचारिकताओं और
निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है।
सुविधा के लिए भारतीय झंडा संहिता, 2002 को तीन भागों में बांटा गया है।
संहिता के भाग 1 में राष्ट्रीय झंडे के बारे में सामान्य विवरण दिया गया है। आम
जनता, निजी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों आदि द्वारा राष्ट्रीय झंडा फहराए जाने
के बारे में संहिता के भाग II में विवरण दिया गया है। केन्द्र और राज्य सरकारों तथा
उनके संगठनों व एजेंसियों द्वारा राष्ट्रीय झंडा फहराए जाने का विवरण संहिता के
भाग III में दिया गया है।
“झंडा संहिता भारत” के स्थान पर “भारतीय झंडा संहिता, 2002” को
26 जनवरी, 2002 से लागू किया गया है।
भाग-I
सामान्य
1.1 राष्ट्रीय झंडे पर तीन अलग-अलग रंगों की पट्टियां होंगी जो समान चौड़ाई
वाली तीन आयताकार पट्टियां होंगी। सबसे ऊपर भारतीय केसरी रंग की पट्टी
होगी और सबसे नीचे भारतीय हरे रंग की पट्टी होगी। बीच की पट्टी सफेद रंग की
होगी जिसके बीचों बीच बराबर की दूरी पर नेवी ब्लू रंग में 24 धारियों वाला
अशोक चक्र बना होगा। बेहतर होगा यदि अशोक चक्र स्क्रीन से प्रिंट किया हुआ या
अन्यथा छपा हुआ या स्टेंसिल किया हुआ या उचित रूप से कढ़ाई किया हुआ हो जो
सफेद पट्टी के बीच में झंडे के दोनों ओर से स्पष्ट दिखाई देता हो ।
1.2 भारत का राष्ट्रीय झंडा हाथ से काते गए और हाथ से बुने गए उनी/सूती सिल्क
खादी के कपड़े से बनाया गया हो ।
1.3राष्ट्रीय झंडे का आकार आयताकार होगा। झंडे की लंबाई और ऊंचाई (चौड़ाई)
का अनुपात 3:2 होगा।
1.4 राष्ट्रीय झंडे के मानक आकार निम्नलिखित होंगे:-
झंडे का आकार वर्ग मिलीमीटरों में माप

6300 x 4200
3600 x 2400
2700 1800
1800 ☑ 1200
1350 x 900
900 600
450 x 300
225 x 150
150 x 100
1.5 फहराने के लिए समुचित आकार के झंडे का चुनाव किया जाए। 450 × 300
मिलीमीटर आकार के झंडे अतिगणमान्य व्यक्तियों को ले जाने वाले हवाई जहाजों
के लिये, 225 × 150 मिलीमीटर आकार के झंडे मोटर कारों और 150 x 100
मिलीमीटर आकार के झंडे मेजों के लिए हैं।भाग-II
आम जनता, गैर-सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं आदि
के द्वारा राष्ट्रीय झंडे का फहराया जाना प्रदर्शन/प्रयोग
धारा I
2.1 आम जनता, गैर-सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं आदि के
द्वारा राष्ट्रीय झंडे के प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा सिवाय संप्रतीक और
नाम (अनुचित प्रयोग का निवारण) अधिनियम, 1950 * और राष्ट्रीय गौरव
* संप्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग का निवारण) अधिनियम, 1950
धारा 2: इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो:-
(क) ‘संप्रतीक’ का अर्थ अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी चिह्न, मोहर,
झंडा, तमगा, कोट-आफ आर्म्स या चित्रात्मक स्वरूप से है;
धारा 3 :
नोट:
इस समय लागू किसी भी कानून में, कोई बात होते हुए भी कोई भी व्यक्ति, केन्द्र
सरकार या सरकार के ऐसे अधिकारी, जिसे केन्द्र सरकारकी ओर से प्राधिकृत किया
जाए, की पूर्व अनुमति केबिना केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा निर्धारित ऐसे मामलों और
ऐसी परिस्थितियों के सिवाय, किसीव्यापार, कारोबार, आजीविका या व्यवसाय के
प्रयोजन के लिए, किसी पेटेंट के हक में या डिजाइनके किसी ट्रेड मार्क में, अनुसूची
में विनिर्दिष्ट किसी नाम औरचिह्न या उससे मिलती-जुलती किसी नकल के प्रयोजनों
के लिए प्रयोग नहीं करेगा या प्रयोग करना जारी नहीं रखेगा।
इस अधिनियम की अनुसूची में भारतीय राष्ट्रीय झंडे को एक संप्रतीक के रूप में
निर्धारितकिया गया है।अपमान निवारण अधिनियम, 1971 * * तथा इस विषय पर बनाए गए किसी
अन्य कानून में बताए गए प्रतिबंध के । उपर्युक्त अधिनियमों में की गई
व्यवस्था के अनुसार निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाएगा:-
(i) झंडे का प्रयोग व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए नहीं किया जाएगा अन्यथा
संप्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग का निवारण) अधिनियम, 1950
का उल्लंघन होगा;
(ii) किसी व्यक्ति या वस्तु को सलामी देने के लिए झंडे को झुकाया नहीं
जाएगा;
(iii) झंडे को आधा झुका कर नहीं फहराया जाएगा सिवाय उन् अवसरों के
जब सरकारी भवनों पर झंडे को आधा झुका कर फहराने के आदेश जारी
किए गए हों;

अक्ष भारत

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